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Monday, 18 March 2013

नेता




मै नेता क्यों नहीं बनता .....?
अगर मै नेता बना तो मशहूर हो जाऊँगा,
मशहूर हो जाऊँगा तो अखबारों में मेरी फोटो छपेगी,
फोटो छपेगी तो लोग पढेंगे-देखेंगे,
फिर अखबार को रद्दी में दाल देंगे,
फिर रद्दी वाला आएगा और उस अख़बार को ले जाएगा,
फिर पुराने अखबार को किसी खोमचे वाले को बेच देगा,
खोमचे वाला उस अखबार में समोसा-जलेबी बाँध के देगा,
लोग समोसा-जलेबी खायेंगे और अखबार को फेंक देंगे,
फिर कुत्ता आएगा और मेरी फोटो वाले अखबार को चाटेगा,
मै नहीं चाहता की कोई कुत्ता मेरा मुँह चाटे,
बस इस लिए मै नेता नहीं बनता .............
बस इस लिए मै नेता नहीं बनता ..............!!!!!!!!!

.............................................राहुल श्रीवास्तव 

Sunday, 17 March 2013

जिन्दा हूँ .......



कोई मेरा भी तो हो साथ निभाने के लिए,


मुझे माँगे खुदा से अपना बनाने के लिए,


मेरे आँसू मेरी पलकों से चुराने के लिए,


बस वही हो मुझे सीने से लगाने के लिए,


यूँ तो है चाहने वाले बहुत से दुनिया में,


नहीं है कोई मगर साथ निभाने के लिए,


मेरे साँसों की रवानी तो फ़क्त धोखा है,


हाँ मै जिन्दा हूँ मगर .........? 


सिर्फ दुनिया को दिखने के लिए ...... 


.........................राहुल श्रीवास्तव 


Saturday, 16 March 2013

इज़हार-ए-दिल ...








बहुत मुश्किल है सोचना कैसे इज़हार करूँ ,


वो तो एक खुशबू है कैसे गिरफ्तार करूँ ,

खुदा जाने मेरी किस्मत में वो है या नहीं ,

आरज़ू है आखिरी साँस तक उसका इंतजार करूँ , 

अगर वो हसीन मेहरबान हो जाए चाहत पर ,

सब भुला के मै सिर्फ उसे ही प्यार करूँ ,

हर आरज़ू पूरी नहीं होती ये मालूम है ,

मगर आरज़ू-ए-दिल से क्यूँ इंकार करूँ ,

दीदार हो काफी है मेरे मोहब्बत लिए ,

डर उनकी नाराजगी का है कैसे इकरार करूँ ,

वो चाहे न चाहे ये उसकी मर्ज़ी है ,

पर मै उसपे अपनी जान निसार करूँ ..............


.......................................राहुल श्रीवास्तव 


Friday, 15 March 2013

मैं " माँ " हूँ !!



 जिस लडके को नौ महीने पेट में रखा वो ,
शादी के नौ महीने बाद .....
बहु को लेकर अलग हो गया ,मैं चुप रही 
कुछ नहीं बोली ,क्यूँ कि मैं माँ हूँ .....
उसके नौ दिन बाद फ़ोन आया , 
पुत्रवधू को अच्छी जॉब मिली है .... 
मैंने पूछा ,तुम्हारा खाना ?
उसने कहा 'टिफिन' मंगवाते हैं ....
मैं सहम गई , मैं चुप रही ....
कुछ नहीं बोली ,क्यूँ कि मैं माँ हूँ .....
नवरात्री में लडके का फ़ोन आया ,
पुत्रवधू प्रेगनेट है ,आप देखभाल करोगी ना ?
मैंने हाँ कही ....  मैं चुप रही ....
कुछ नहीं बोली ,क्यूँ कि मैं माँ हूँ .....
पुत्रवधू ने पुत्र को जन्म दिया ......
पौत्र का मुख देख कर मैं रो पड़ी ...
पुत्र ने पूछा ,माँ ये ख़ुशी के आंसू है ?

 मैं चुप रही ....
कुछ नहीं बोली ,क्यूँ कि मैं माँ हूँ .....
पुत्र ने पूछा ,माँ तुम ,तुम्हारे घर ,हमारे बेटे का 
बेबी सिटिंग करोगी ना ? मैं यह सुन कर हंसी ....

 मैं चुप रही ....
कुछ नहीं बोली ,क्यूँ कि मैं माँ हूँ .....
कुछ वर्षों के बाद , एक दिन पौत्र ने पूछा .... 
दादी जी ... दादी जी ....
आप हमलोगों से अलग क्यूँ हैं ?
यह सुन कर मैं रो पड़ी ....

लेकिन हाँ .... मैं चुप रही ....  
कुछ नहीं बोली ,क्यूँ कि मैं माँ हूँ .....





....................................... राहुल श्रीवास्तव ........


Thursday, 14 March 2013

शर्त ...




मिलता है मगर बिछड़ने की शर्त पर,
जिंदा तो है मगर मरने की शर्त पर |

जिंदिगी तेरी अदा है या बेबसी मेरी,
हौसला मिलता है, मगर डरने की शर्त पर |

पल दो पल से ज़्यादा कहीं भी रुकता नहीं,
वक्त अच्छा आता है गुजरने की शर्त पर |

ये रिहाई भी क्या कोई रिहाई है सितमगर,
परिंदा आज़ाद किया पंख कतरने की शर्त पर |

फिर किस बात का भरोसा करिये ‘वीर’,
वो वादा भी करते हैं मुकरने की शर्त पर |


...................................राहुल श्रीवास्तव 



Tuesday, 12 March 2013

अजनबी ...

 


एक अजनबी से मोहब्बत हो गई  है

ये ज़िन्दगी हमारी मुकम्मल हो गई है


सोचते है वो चेहरा कैसा होगा

जिस से हमें चाहत हो गई है 


जब लेती हूँ नाम ये साँसे महक उठती है

अब ये साँसे भी मेरी उसकी हो गई है


उसका यूँ रोज मेरी नींदों में चले आना

मेरे सपनो की दुनिया अब रौशन हो गई है


धड़क उठता है दिल जब महसूस करती है आँखे

ऐसा लगता है ये धड़कन भी उस के नाम हो गई है 


उसे ही सोचते सोचते गुज़रती है अब ये रातें मेरी 

मेरी रातें भी अब मेरे सनम के हवाले हो गई है


एक अजनबी से ................

............................................राहुल श्रीवास्तव 



और - फिर

प्रश्न , प्रलाप , गुहार
और
हिकारत रूप में ,
ख़ामोशी टूटती है ....

तो
एक नए सुबह
होने के इन्तजार में ....

लेकिन
नई सुबह के साथ-साथ
कई भ्रम भी टूट जाते हैं ....

फिर
टूटे भ्रम , किरिच के
चुभन का एहसास कराते हैं ....

Monday, 11 March 2013

हार या जीत








कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ..
 या दिल का सारा प्यार लिखूँ.. 
 कुछ अपनो के जज़्बात लिखूँ या सपनो की सौगात लिखूँ.. 
 मै खिलता सुरज आज लिखूँ या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ..
 वो डूबते सूरज को देखूँ या उगते फूल की सांस लिखूँ.. 
 वो पल मे बीते साल लिखूँ या सदियों लम्बी रात लिखूँ.. 
 सागर सा गहरा हो जाऊं या अम्बर का विस्तार लिखूँ.. 
 मै तुमको अपने पास लिखूँ या दूरी का ऐहसास लिखूँ.. 
 वो पहली -पहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ.. 
 सावन की बारिश मेँ भीगूँ या मैं आंखों की बरसात लिखूँ.. 
 कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ.. या दिल का सारा प्यार लिखूँ..

......... राहुल श्रीवास्तव ...........

मन की आवाज





         दिल दुखा कर, आजमा कर, या रुला कर छोड़ना, 

            हमने सिखा ही नहीं अपना बना कर छोड़ना।


           ताकि दुनिया ये न समझे हम में दुरी हो गयी,

           साथ जब भी छोड़ना तो मुस्कुरा कर छोड़ना।


           हैं तरिक़े और भी मुझसे बिछड़ने के लिए,

          क्या ज़रूरी है कोई तोहमत लगा कर छोड़ना।


           होश बाक़ी रह गए तो जी नहीं पाउँगा मैं,

       कुछ ना याद आये मुझे इतनी पिला कर छोड़ना।


              तेल के बदले हमें चाहे लहूँ देना पड़े,

        अपनी फ़ितरत है चिराग़ों को जला कर छोड़ना।


          कुफ्र है एहसास-ए-मायूसी, थकन है बुजदिली,

            हौसलों की डोर को मंजिल पर जा के छोड़ना।  


.............राहुल श्रीवास्तव 





Sunday, 10 March 2013

इश्क़


तन्हाई  में मुस्कुराना भी इश्क़ है 

इस बात को सब से छुपाना भी इश्क़ है 

यूँ तो रातों को नींद नहीं आती 

पर रातों को सो कर भी जाग जाना इश्क़ है 



"राहुल श्रीवास्तव" 






Saturday, 9 March 2013

भारतमाता

भारमाता 

कैसे सो जाऊ हमसफ़र तेरी जुल्फों के साए में 

................कड़ी धूप में मेरी 'माँ ' (भारत) झुलस रही है 

कैसे बुझाऊ मैं तेरी आँखों से दिल की प्यास 

.................के रूह भी अब मेरी' माँ ' की सुलग रही है

कैसे पढू आज मैं तेरे प्यार के कसीदे

.....................के जुबान अब मेरी "आग " उगल रही है

कैसे लिखू मैं वफाओं के किस्से

...............के मेरी कलम को अब "गद्दारी" निगल रही है 

                                                       राहुल श्रीवास्तव  


                                        

दिल


दिल 


हम दर- बदर की ठोकरे खाते चले गए !

फिर भी तराने प्यार के गाते चले गए !


कोशिश तो की भंवर ने डुबाने की बार बार!


तूफां से कश्ती फिर भी बचाते चले गए !!






और भी बनती लकीरें दर्द की शायद कई

शुक्र है तेरा खुदा जो हाथ छोटा सा दिया


तूने जो बख्शी हमें बस चार दिन की ज़िंदगी


या ख़ुदा अच्छा किया जो साथ छोटा सा दिया


..................................राहुल श्रीवास्तव 






Friday, 8 March 2013

नारी का सम्मान



नारी का सम्मान 

आसमान सा है जिसका विस्तार
चॉद-सितारों का जो सजाए संसार
धरती जैसी है सहनशीलता जिसमें
है नारी हर जीवन का आधार

कभी फूल सा रंग-सुगंध लगे
कभी चींटी सा बोझ उठाए अपार
कभी स्नेह का लगे दरिया निर्झर
कभी बने किसी का परम आधार

चूल्हा-चौका रिश्तों-नातों की वेणी
हर घर की यह गरिमामय श्रृंगार
आज कहाँ से कहाँ पहुँच गई है
हर नैया की बन सशक्त पतवार

घर से दफ़्तर चूल्हे से चंदा तक
पुरुष संग अब दौड़े यह नार
महिला दिवस है शक्ति दिवस भी
पुरुष नज़रिया में हो और सुधार।।
......................राहुल श्रीवास्तव  

“नारी तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नग पग तल में।

पीयूष स्रोत सी बहा करो, जीवन के सुंदर समतल में।।“


Thursday, 7 March 2013

माँ











माँ , तेरी गोद मुझे,
मेरे अनमोल,
होने का,
एहसास कराती है॥
माँ, तेरी हिम्मत,
मुझको,
जग जीतने का,
विश्वास दिलाती है॥
माँ, तेरी सीख,
मुझे ,
आदमी से,
इंसान बनाती है॥
माँ, तेरी डाँट,
मुझे, नित नयी,
राह दिखाती है॥
माँ, तेरी सूरत,
मुझे मेरी,
पहचान बताती है॥
माँ, तेरी पूजा,
मेरा, हर,
पाप मिटाती है॥
माँ तेरी लोरी,
अब भी, मीठी ,
नींद सुलाती है॥
माँ , तेरी याद,
मुझे,
बहुत रुलाती है॥
माँ , माँ है और कोई उस
जैसा नहीं होता।
........................राहुल  श्रीवास्तव 


Wednesday, 6 March 2013

दिल

__________     दिल ____________



दिल  की  ख्वाहिश  को  नाम  क्या दूँ  ,

प्यार  का  उसे  पैगाम  क्या दूँ  ,

इस दिल में दर्द नहीं यादें हैं , उसकी ,

अब यादे ही मुझे दर्द दे तो उसे इल्ज़ाम  क्या दूँ  ....??

~ सच्चाई ~



__________सच्चाई__________
फेसबूक की कड़वी सच्चाई पर एक नजर !

फ़ेस बुक पर एक कन्या ने , खाता नया बनाया ,
खाता खुलते ही मित्रों का ,नव संदेशा आया ।
और उन्हीं  में  एक युवक का , नम्र निवेदन पाया,
सुंदर फोटो देख के, कन्या का दिल उस पर आया।
चेटिंग करते करते नित, कन्या को युवक भाया ,
प्रेम का दरिया बह निकला,हृदय पुष्प अकुलाया ।
कन्या हुई दिवानी उसकी, मिलन का मन बनाया ,
एक नियत सुंदर स्थल पर , मिलने उसेबुलाया।
व्यस्त हूँ कहकर वह प्रेमी, मिलने न उसको आया,
लेकिन प्रेम भरी बातों का, सिलसिला नहीं घटाया।
कई माह तक कन्या से, जब वह न मिलने आया,
प्रेम से व्याकुल कन्या ने , मन में संकल्प बनाया।
पता प्रेमी का कन्या ने, एकदिन खोज कराया ,
और अचानक प्रेमी के घर, अपना कदम बढ़ाया ।
सकते मे आ गई जब , प्रेमी को उसने पाया,
वह था न कोई युवा सलोना,बासठ का बूढ़ा पाया।
बचपन का फोटो और झूठे, नाम से जाल बिछाया,
मीठी- मीठी बातों से, भोली बाला कोफंसाया ।
टूट गए सब स्वप्न सुनहरे , दिल ने धोखा खाया,
प्रेम की डोर कटी रेशमी, हृदय बहुत पछताया ।
अपनी मूरखता पर अब , कन्या को रोनाआया ,
व्यर्थ किया समय अपना , दिल पे घाव बनाया।
शादी के अच्छे सच्चे, रिश्तों को ठुकराया,
अनजान से दोस्ती का, खमियाजा उसने पायI !!
__________सच्चाई__________

फेसबूक की कड़वी सच्चाई पर एक नजर!
फ़ेस बुक पर एक कन्या ने , खाता नया बनाया ,
खाता खुलते ही मित्रों का ,नव संदेशा आया ।
और उन्ही मे एक युवक का , नम्र निवेदन पाया,
सुंदर फोटो देख के, कन्या का दिल उस पर आया।
चेटिंग करते करते नित, कन्या को युवक भाया ,
प्रेम का दरिया बह निकला,हृदय पुष्प अकुलाया ।
कन्या हुई दिवानी उसकी, मिलन का मन बनाया ,
एक नियत सुंदर स्थल पर , मिलने उसेबुलाया।
ब्यस्त हूँ कहकर वह प्रेमी, मिलने न उसको आया,
लेकिन प्रेम भरी बातों का, सिलसिला नहीं घटाया।
कई माह तक कन्या से, जब वह न मिलने आया,
प्रेम से व्याकुल कन्या ने , मन में संकल्प बनाया।
पता प्रेमी का कन्या ने, एकदिन खोज कराया ,
और अचानक प्रेमी के घर, अपना कदम बढ़ाया ।
सकते मे आ गई जब , प्रेमी को उसने पाया,
वह था न कोई युवा सलोना,बासठ का बूढ़ा पाया।
बचपन का फोटो और झूठे, नाम से जाल बिछाया,
मीठी- मीठी बातों से, भोली बाला कोफंसाया ।
टूट गए सब स्वप्न सुनहरे , दिल ने धोखा खाया,
प्रेम की डोर कटी रेशमी, हृदय बहुत पछताया ।
अपनी मूरखता पर अब , कन्या को रोनाआया ,
ब्यर्थ किया समय अपना , दिलपे घावबनाया।
शादी के अच्छे सच्चे, रिश्तों को ठुकराया,
अनजान से दोस्ती का, खमियाजा उसनेपायI i
..........................Rahul..................























तौहफा




कांच का तौहफा ,,,,,,,, ना देना कभी
रूठ के लोग,,,,,,,,,, तोड़ दिया करते है,
जो बहुत अच्छे हो,,,,,,, उनसे प्यार ना करना
अक्सर अच्छे लोग,,,,,,,, ही दिल तोड़ दिया करते हैं..

................................Rahul.............