
जिस लडके को नौ महीने पेट में रखा वो ,
शादी के नौ महीने बाद .....
बहु को लेकर अलग हो गया ,मैं चुप रही
कुछ नहीं बोली ,क्यूँ कि मैं माँ हूँ .....
उसके नौ दिन बाद फ़ोन आया ,
पुत्रवधू को अच्छी जॉब मिली है ....
मैंने पूछा ,तुम्हारा खाना ?
उसने कहा 'टिफिन' मंगवाते हैं ....
मैं सहम गई , मैं चुप रही ....
कुछ नहीं बोली ,क्यूँ कि मैं माँ हूँ .....
नवरात्री में लडके का फ़ोन आया ,
पुत्रवधू प्रेगनेट है ,आप देखभाल करोगी ना ?
मैंने हाँ कही .... मैं चुप रही ....
कुछ नहीं बोली ,क्यूँ कि मैं माँ हूँ .....
पुत्रवधू ने पुत्र को जन्म दिया ......
पौत्र का मुख देख कर मैं रो पड़ी ...
पुत्र ने पूछा ,माँ ये ख़ुशी के आंसू है ?
मैं चुप रही ....
कुछ नहीं बोली ,क्यूँ कि मैं माँ हूँ .....
पुत्र ने पूछा ,माँ तुम ,तुम्हारे घर ,हमारे बेटे का
बेबी सिटिंग करोगी ना ? मैं यह सुन कर हंसी ....
मैं चुप रही ....
कुछ नहीं बोली ,क्यूँ कि मैं माँ हूँ .....
कुछ वर्षों के बाद , एक दिन पौत्र ने पूछा ....
दादी जी ... दादी जी ....
आप हमलोगों से अलग क्यूँ हैं ?
यह सुन कर मैं रो पड़ी ....
लेकिन हाँ .... मैं चुप रही ....
कुछ नहीं बोली ,क्यूँ कि मैं माँ हूँ .....
....................................... राहुल श्रीवास्तव ........
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