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Saturday, 9 March 2013

भारतमाता

भारमाता 

कैसे सो जाऊ हमसफ़र तेरी जुल्फों के साए में 

................कड़ी धूप में मेरी 'माँ ' (भारत) झुलस रही है 

कैसे बुझाऊ मैं तेरी आँखों से दिल की प्यास 

.................के रूह भी अब मेरी' माँ ' की सुलग रही है

कैसे पढू आज मैं तेरे प्यार के कसीदे

.....................के जुबान अब मेरी "आग " उगल रही है

कैसे लिखू मैं वफाओं के किस्से

...............के मेरी कलम को अब "गद्दारी" निगल रही है 

                                                       राहुल श्रीवास्तव  


                                        

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