भारतमाता
कैसे सो जाऊ हमसफ़र तेरी जुल्फों के साए में
................कड़ी धूप में मेरी 'माँ ' (भारत) झुलस रही है
कैसे बुझाऊ मैं तेरी आँखों से दिल की प्यास
.................के रूह भी अब मेरी' माँ ' की सुलग रही है
कैसे पढू आज मैं तेरे प्यार के कसीदे
.....................के जुबान अब मेरी "आग " उगल रही है
कैसे लिखू मैं वफाओं के किस्से
...............के मेरी कलम को अब "गद्दारी" निगल रही है
राहुल श्रीवास्तव


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