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Monday, 11 March 2013

हार या जीत








कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ..
 या दिल का सारा प्यार लिखूँ.. 
 कुछ अपनो के जज़्बात लिखूँ या सपनो की सौगात लिखूँ.. 
 मै खिलता सुरज आज लिखूँ या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ..
 वो डूबते सूरज को देखूँ या उगते फूल की सांस लिखूँ.. 
 वो पल मे बीते साल लिखूँ या सदियों लम्बी रात लिखूँ.. 
 सागर सा गहरा हो जाऊं या अम्बर का विस्तार लिखूँ.. 
 मै तुमको अपने पास लिखूँ या दूरी का ऐहसास लिखूँ.. 
 वो पहली -पहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ.. 
 सावन की बारिश मेँ भीगूँ या मैं आंखों की बरसात लिखूँ.. 
 कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ.. या दिल का सारा प्यार लिखूँ..

......... राहुल श्रीवास्तव ...........

1 comment:

  1. सच लिखना थोडा मुश्किल होता है ,
    लेकिन चिर-स्थाई होता है ...
    शुभकामनायें ....

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