बहुत मुश्किल है सोचना कैसे इज़हार करूँ ,
वो तो एक खुशबू है कैसे गिरफ्तार करूँ ,
खुदा जाने मेरी किस्मत में वो है या नहीं ,
आरज़ू है आखिरी साँस तक उसका इंतजार करूँ ,
अगर वो हसीन मेहरबान हो जाए चाहत पर ,
सब भुला के मै सिर्फ उसे ही प्यार करूँ ,
हर आरज़ू पूरी नहीं होती ये मालूम है ,
मगर आरज़ू-ए-दिल से क्यूँ इंकार करूँ ,
दीदार हो काफी है मेरे मोहब्बत लिए ,
डर उनकी नाराजगी का है कैसे इकरार करूँ ,
वो चाहे न चाहे ये उसकी मर्ज़ी है ,
पर मै उसपे अपनी जान निसार करूँ ..............
.......................................राहुल श्रीवास्तव
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