एक अजनबी से मोहब्बत हो गई है
ये ज़िन्दगी हमारी मुकम्मल हो गई है
सोचते है वो चेहरा कैसा होगा
जिस से हमें चाहत हो गई है
जब लेती हूँ नाम ये साँसे महक उठती है
अब ये साँसे भी मेरी उसकी हो गई है
उसका यूँ रोज मेरी नींदों में चले आना
मेरे सपनो की दुनिया अब रौशन हो गई है
धड़क उठता है दिल जब महसूस करती है आँखे
ऐसा लगता है ये धड़कन भी उस के नाम हो गई है
उसे ही सोचते सोचते गुज़रती है अब ये रातें मेरी
मेरी रातें भी अब मेरे सनम के हवाले हो गई है
एक अजनबी से ................
............................................राहुल श्रीवास्तव

No comments:
Post a Comment