दिल
हम दर- बदर की ठोकरे खाते चले गए !
फिर भी तराने प्यार के गाते चले गए !
कोशिश तो की भंवर ने डुबाने की बार बार!
तूफां से कश्ती फिर भी बचाते चले गए !!
और भी बनती लकीरें दर्द की शायद कई
शुक्र है तेरा खुदा जो हाथ छोटा सा दिया
तूने जो बख्शी हमें बस चार दिन की ज़िंदगी
या ख़ुदा अच्छा किया जो साथ छोटा सा दिया
..................................राहुल श्रीवास्तव

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