प्रश्न , प्रलाप , गुहार
और
हिकारत रूप में ,
ख़ामोशी टूटती है ....
तो
एक नए सुबह
होने के इन्तजार में ....
लेकिन
नई सुबह के साथ-साथ
कई भ्रम भी टूट जाते हैं ....
फिर
टूटे भ्रम , किरिच के
चुभन का एहसास कराते हैं ....
और
हिकारत रूप में ,
ख़ामोशी टूटती है ....
तो
एक नए सुबह
होने के इन्तजार में ....
लेकिन
नई सुबह के साथ-साथ
कई भ्रम भी टूट जाते हैं ....
फिर
टूटे भ्रम , किरिच के
चुभन का एहसास कराते हैं ....
अहसास नयी राह बनाने के हिम्मत भी देते हैं .....
ReplyDeleteशुभकामनायें !!
sukriya didi........
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